भारत की देसी गाय की नस्लें और उनकी जानकारी

भारत में गायों को देवताओं का स्वरूप माना जाता है, और उनकी पूजा की जाती है यह तो आप जानते ही होंगे, पर भारत में कितने प्रकार की गायों की नस्लें हैं वह आप नहीं जानते होंगे, तो अभी हम गाय की नस्ल की जानकारी लेंगे।

हम देखेंगे भारत में कितने प्रकार की गाय की नस्ल है और वह कहां पाई जाती है। और सबसे ज्यादा दूध देने वाली गाय की नस्ल कौनसी है, या गाय की नस्ल की पहचान क्या है।

ये हैं भारत की देसी गाय की नस्लें

साहिवाल गाय

साहिवाल गाय की फोटो
साहिवाल गाय की फोटो

साहीवाल नस्ल की गायों का सिर चौड़ा उभरा हुआ, सींग छोटी और मोटी, तथा माथा मझोला होता है। भारत में ये राजस्थान के बीकानेर,श्रीगंगानगर, पंजाब में मांटगुमरी जिला और रावी नदी के आसपास लायलपुर, लोधरान, गंजीवार आदि स्थानों में पाई जाती है। ये भारत में कहीं भी रह सकती हैं। एक बार ब्याने पर ये 10 महीने तक दूध देती रहती हैं। दूध का परिमाण प्रति दिन 10-20 लीटर प्रतिदिन होता है। इनके दूध में मक्खन का अंश पर्याप्त होता है। इसके दूध में वसा 4 से 6% पाई जाती है।

(पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, बिहार)

रेड सिंधी गाय

रेड सिंधी गाय की फोटो
रेड सिंधी गाय की फोटो

इनका मुख्य स्थान सिंध का कोहिस्तान क्षेत्र है। बिलोचिस्तान का केलसबेला इलाका भी इनके लिए प्रसिद्ध है। इन गायों का वर्ण बादामी या गेहुँआ, शरीर लंबा और चमड़ा मोटा होता है। ये दूसरी जलवायु में भी रह सकती हैं तथा इनमें रोगों से लड़ने की अद्भुत शक्ति होती है। संतानोत्पत्ति के बाद ये 300 दिन के भीतर कम से कम 2000 लीटर दूध देती हैं।

(सिंध का कोहिस्तान, बलूचिस्तान)

कांकरेज गाय

कांकरेज गाय
कांकरेज गाय

कच्छ की छोटी खाड़ी से दक्षिण-पूर्व का भूभाग, अर्थात् सिंध के दक्षिण-पश्चिम से अहमदाबाद और रधनपुरा तक का प्रदेश, काँकरेज गायों का मूलस्थान है। वैसे ये काठियावाड़, बड़ोदा और सूरत में भी मिलती हैं। ये सर्वांगी जाति की गाए हैं और इनकी माँग विदेशों में भी है। इनका रंग रुपहला भूरा, लोहिया भूरा या काला होता है। टाँगों में काले चिह्न तथा खुरों के ऊपरी भाग काले होते हैं। ये सिर उठाकर लंबे और सम कदम रखती हैं। चलते समय टाँगों को छोड़कर शेष शरीर निष्क्रिय प्रतीत होता है जिससे इनकी चाल अटपटी मालूम पड़ती है। केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में गाय पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों के अनुसार कांकरेज गाय किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ा सकती है।

(कच्छ की छोटी खाड़ी से दक्षिण-पूर्व का भू-भाग)

मालवी गाय

मालवी गाय
मालवी गाय

ये गायें दुधारू नहीं होतीं। इनका रंग खाकी होता है तथा गर्दन कुछ काली होती है। अवस्था बढ़ने पर रंग सफेद हो जाता है। ये ग्वालियर के आस-पास पाई जाती हैं।

मालवी प्रजाति के बैलों को खेती के लिए और सड़कों पर गाड़ी खींचने के लिए किया जाता है।

(मध्यप्रदेश, ग्वालियर)

नागौरी गाय

नागौरी गाय
नागौरी गाय

इनका प्राप्तिस्थान जोधपुर के आस-पास का प्रदेश है। ये गायें भी विशेष दुधारू नहीं होतीं, किंतु ब्याने के बाद बहुत दिनों तक थोड़ा-थोड़ा दूध देती रहती हैं।

इस प्रजाति की गाय राजस्थान के नागौर जिले में पाई जाती है।

(जोधपुर के आसपास)

थारपारकर गाय

थारपारकर गाय
थारपारकर गाय

ये गायें दुधारू होती हैं। इनका रंग खाकी, भूरा, या सफेद होता है। कच्छ, जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर और सिंध का दक्षिणपश्चिमी रेगिस्तान इनका प्राप्तिस्थान है। इनकी खुराक कम होती है ओर इसका दूध 10 से 16 लीटर प्रतिदिन तक होता है।

पोंवर गाय

पोंवर गाय
पोंवर गाय

पीलीभीत, पूरनपुर तहसील और खीरी इनका प्राप्तिस्थान है। इनका मुँह सँकरा और सींग सीधी तथा लंबी होती है। सींगों की लबाई 12-18 इंच होती है। इनकी पूँछ लंबी होती है। ये स्वभाव से क्रोधी होती है और दूध कम देती हैं।

(पीलीभीत, पूरनपुर तहसील और खीरी)

भगनाड़ी गाय

नाड़ी नदी का तटवर्ती प्रदेश इनका प्राप्तिस्थान है। ज्वार इनका प्रिय भोजन है। नाड़ी घास और उसकी रोटी बनाकर भी इन्हें खिलाई जाती है। ये गायें दूध खूब देती हैं।

(नाड़ी नदी का तटवर्ती प्रदेश)

दज्जल गाय

भगनारी नस्ल का दूसरा नाम ‘दज्जल नस्ल है। इस नस्ल के पशु पंजाब के ‘दरोगाजी खाँ जिले में बड़ी संख्या में पाले जाते हैं। कहा जाता है कि इस जिले के कुछ भगनारी नस्ल के सांड़ खासतौर पर भेजे गये थे। यही कारण है कि ‘दरोगाजी खाँ में यह नस्ल काफी पायी जाती है। इस नस्ल की गाय में अधिक दूध देने की क्षमता होती है।

(पंजाब के डेरा गाजी खां जिला)

गावलाव गाय

गावलाव गाय
गावलाव गाय

दूध साधारण मात्रा में देती है। प्राप्तिस्थान सतपुड़ा की तराई, वर्धा, छिंदवाड़ा, नागपुर, सिवनी तथा बहियर है। इनका रंग सफेद और कद मझोला होता है। ये कान उठाकर चलती हैं।

(सतपुड़ा की तराई, वर्धा, छिंदवाड़ा, नागपुर, सिवनी तथा बहियर)

हरियाना गाय

हरियाना गाय
हरियाना गाय

ये 8-12 लीटर दूध प्रतिदिन देती हैं। गायों का रंग सफेद, मोतिया या हल्का भूरा होता हैं। ये ऊँचे कद और गठीले बदन की होती हैं तथा सिर उठाकर चलती हैं। इनका प्राप्तिस्थान रोहतक, हिसार, सिरसा, करनाल, गुडगाँव और जिंद है। भारत की पांच सबसे श्रेष्ठ नस्लो में हरयाणवी नस्ल आती है। यह अद्भुत है।

(रोहतक, हिसार, सिरसा, करनाल, गुडगांव और जींद)

अंगोल या नीलोर गाय

ये गाएँ दुधारू, सुंदर और मंथरगामिनी होती हैं। प्राप्तिस्थान तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुंटूर, नीलोर, बपटतला तथा सदनपल्ली है। ये चारा कम खाती हैं।

(तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, गुंटूर, नीलोर, बपटतला तथा सदनपल्ली)

राठी गाय

राठी गाय
राठी गाय

इस गाय का मूल मूल स्थान राजस्थान में बीकानेर, श्रीगंगानगर हैं। ये लाल-सफेद चकते वाली,काले-सफेद,लाल, भूरी,काली, आदि कई रंगों की होती है। ये खाती कम और दूध खूब देती हैं। ये प्रतिदिन का 10 से 20 लीटर तक दूध देती है। इस पर पशु विश्वविद्यालय बीकानेर राजस्थान में रिसर्च भी काफी हुआ है। इसकी सबसे बड़ी खासियत, ये अपने आप को भारत के किसी भी कोने में ढाल लेती है।

गीर गाय

गीर गाय
गीर गाय

ये प्रतिदिन 12 लीटर या इससे अधिक दूध देती हैं। इनका मूलस्थान काठियावाड़ का गीर जंगल है। राजस्थान में रैण्डा व अजमेरी के नाम से जाना जाता है[कृपया उद्धरण जोड़ें] केंद्रीय गोवंश अनुसंधान संस्थान में गाय पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों के अनुसार गीर गाय किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ा सकती है।

(दक्षिण काठियावाड़)

देवनी गाय

देवनी गाय
देवनी गाय

दक्षिण आंध्र प्रदेश और हिंसोल में पाई जाती हैं। इस नस्ल के बैल अधिक भार ढोने की क्षमता रखते हैं। गायें दुधारू होती हैं।

(दक्षिण आंध्रप्रदेश, हिंसोल)

नीमाड़ी गाय

नीमाड़ी गाय
नीमाड़ी गाय

नर्मदा नदी की घाटी इनका प्राप्तिस्थान है। इनके मुँह की बनावट गिर जाति की जैसी होती है। गाय के शरीर का रंग लाल होता है, जिस पर जगह-जगह सफेद धब्बे होते हैं। इस नस्ल की गाय दूध उत्पादन के मामले में अच्छी है।

देसी गायों के संबंध में पूछे जाने वाले सवाल

देसी गाय कितने प्रकार की होती हैं?

भारत में देसी गायों की नस्लें 30 से अधिक है।

सबसे ज्यादा दूध देने वाली गाय की नस्ल कौनसी है?

भारत में सबसे ज्यादा दूध देने वाली गायों में गिर गाय, साहिवाल गाय, लाल सिंधी और राठी गाय आती है।

गाय की उम्र कितनी होती है?

पशु चिकित्सक के मुताबिक, एक स्वस्थ गाय की औसतन उम्र 18 से 20 वर्ष ही होती है।

सबसे अच्छी गाय कौन सी होती है?

गिर गाय को भारत की सबसे ज्यादा दुधारू गाय माना जाता है। यह गाय एक दिन में 50 से 80 लीटर तक दूध देती है।

गाय का वैज्ञानिक नाम क्या?

Bos taurus

गाय के दूध में कितनी कैलोरी होती है?

दूसरी तरफ गाय के एक कप दूध से आपको 8 ग्राम प्रोटीन मिलती है। कैलोरी की मात्रा- अगर आप वजन को नियंत्रित रखना चाहते हैं तो गाय का दूध आपके लिए सही है। भैंस के 1 कप दूध में जहाँ 285.5 कैलोरी होती है वहीं गाय के एक कप दूध में सिर्फ 160 कैलोरी ही होती हैं।

गाय के दूध के क्या फायदे हैं?

– इससे हार्ट, डायबिटीज, कैंसर, टीबी, हैजा जैसे बीमारियां दूर रहती हैं।
– बच्चों के दिमागी विकास के लिए यह दूध लाभदायक माना जाता है।
– दूध मीठा होने की वजह से यह पित्त और गैस की समस्या को भी दूर करता है। …
– मूत्राशय से संबंधित रोगों में गाय के दूध में गुड़ मिलाकर पीने से काफी फायदा मिलता है।

अंत में:

आपको हमारी यह जानकारी कैसी लगी नीचे कमेंट करके बताएं, या गायों से संबंधित कोई भी आपका सवाल हो तो वह भी आप हमसे पूछ सकते हैं।

स्रोत: विकीपीडिया, Agri IS

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